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Updated Mon, 17 May 2021 11:35 PM

16 अस्पतालों में ठप होगी पानी-बिजली

झाँसी : कोरोना मरी़जों की सुविधा के लिए चिह्नित किए गए 35 प्राइवेट अस्पतालों में से 16 ने हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की लिस्ट में शामिल यह अस्पताल कोविड मरीजों को भर्ती करने से इन्कार कर रहे हैं। यह सभी अस्पताल अब ़िजलाधिकारी के रडार पर आ गए हैं। संचालकों को पानी-बिजली का कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई है। कोविड का संघर्ष बढ़ने के बाद प्रशासन ने मेडिकल कॉलिज के साथ आसपास के 35 निजी चिकित्सालयों को भी चिह्नित कर कोविड मरी़जों के उपचार की व्यवस्था कराई थी। इन अस्पतालों में ऑक्सिजन की आपूर्ति से लेकर अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए, लेकिन 16 प्राइवेट अस्पतालों ने मानव सेवा के इस पुनीत कार्य से पीछा छुड़ा लिया है। मेडिकल कॉलिज में आने वाले मरी़जों को जब इन अस्पतालों में भेजा जा रहा है तो अस्पताल से उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। इससे मरी़जों की हालत और बिगड़ रही है। व्यवस्थाओं में रोड़ा अटकाने वाले यह प्राइवेट अस्पताल अब प्रशासन के रडार पर आ गए हैं। ़िजलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने बताया कि अस्पताल संचालकों को चेतावनी दी जा चुकी है। शुक्रवार से अगर यह अस्पताल कोविड मरी़जों का उपचार करने से इन्कार करते हैं तो इनकी बिजली व पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा।

कोटेदार लगा रहे गुहार, दुकान वापस ले लो सरकार

झाँसी : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा ़कानून लागू होने के बाद कुछ सरकारी राशन विक्रेताओं के बुरे दिन आ गए हैं। आलम यह है कि कुछ दुकान को विभागीय कार्यवाही में बन्द किया गया तो कुछ विक्रेता कम कमिशन और घालमेल ना कर पाने के चलते दुकान चलाने से हाथ खड़े कर चुके हैं। और जो दुकानदार हिम्मत कर दुकान चलाने का प्रयास कर रहे हैं, उन पर सरकार ने ऐसा नियम लागू कर दिया है जिससे दुकान चलाना नामुमकिन-सा हो रहा है। इस शासनादेश के बाद गली-मोहल्लों में खुली दुकानें जल्दी ही बन्द हो जाएंगी। दरअसल, जब से राशन वितरण का कार्य डिजिटल माध्यम से शुरू हुआ है तब से कई ऐसे कोटेदारों की नींद उड़ी हुई है, जो पहले सरकारी राशन को बा़जार में बेच कर अपना घर भर रहे थे। असल में इस खाद्य सुरक्षा ़कानून का उद्देश्य भी यही है कि ़गरीब के ह़क पर कोई भी डाका नहीं डाल सके। उक्त ़कानून का असर भी यह हुआ कि ़िजले के कुछ कोटेदारों ने राशन की दुकान चलाने से हाथ खड़े कर दिए और दुकान सरेण्डर करने के लिए आवेदन भी विभाग में दे दिए। वहीं, कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं, जिन्होंने सख़्ती के बाद भी राशन का खेल जारी रखने का प्रयास किया और नप गए। बता दें कि ़िजले में इस समय कुल 788 सरकारी राशन की दुकानें संचालित की जा रही हैं। एक वर्ष पहले इन दुकानों की संख्या 802 थी। इसके अलावा कुछ दुकाने इसलिए भी बन्द हो होती जा रही हैं कि कई साल से कोटेदारों को मिलने वाला कमिशन बढ़ाया ही नहीं गया।

ऑक्सिजन के लिए कई राज्यों से साधा सम्पर्क

झाँसी : कोविड मरी़जों की साँस फुला रही ऑक्सिजन का प्रबन्ध करने के लिए प्रशासन ने पूरी ता़कत झोंक दी है। कई राज्यों से सम्पर्क साधा गया है, ताकि हर दिन एक टैंकर ऑक्सिजन की व्यवस्था की जा सके। कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों के लिए अब साँसों का संघर्ष बढ़ता जा रहा है। पेशेण्ट की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होने के कारण संसाधन कम पड़ने लगे हैं। ऑक्सिजन की भी लगातार कमी होती जा रही है। ऑक्सिजन की व्यवस्था करने के लिए प्रशासन ने पूरी ता़कत झोंक दी है। कई राज्यों में स्थापित ऑक्सिजन प्लाण्ट से सीधे सम्पर्क किए जा रहे हैं तो सम्बन्धित राज्य के मन्त्रियों व प्रभावशाली नेताओं से भी सम्पर्क साधा जा रहा है। स्थानीय नेता भी मदद के लिए उतर आए हैं। सांसद से लेकर विधायक व विपक्षी नेता भी अपने-अपने स्रोतों से ऑक्सिजन की जुगाड़ में जुट गए हैं। ़िजलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने बताया कि ऑक्सिजन के लिए झारखण्ड के बोकारो, मध्य प्रदेश के इन्दौर, भोपाल, छत्तीसगढ़ के भिलाई, महाराष्ट्र के भिवण्डी, आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थापित प्लाण्ट से सम्पर्क साधा गया है। फिलहाल ऑक्सिजन के लिए कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने बताया कि जब तक झाँसी मेडिकल कॉलिज व ़िजला अस्पताल में ऑक्सिजन प्लाण्ट स्थापित नहीं हो जाते हैं, तब तक प्रति दिन एक टैंकर की व्यवस्था करना है। प्रशासन कुछ भी कहे, लेकिन हर दिन एक टैंकर ऑक्सिजन की व्यवस्था करना कठिन चुनौती भी है, क्योंकि जहाँ-जहाँ से ऑक्सिजन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, वहाँ भी कोरोना बेकाबू हो चुका है और ऑक्सिजन की आवश्यकता हद पार कर चुकी है।